22 October 2015

बेरोजगारी को मात देने में जुटे लडभड़ोल क्षेत्र के युवा, गांव-गांव में खुल रहे रेस्तरां

लडभड़ोल : एक तरफ कोरोना ने पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है वहीं लडभड़ोल क्षेत्र के युवा करोना के कारण उत्पन हुई इस बेरोजगारी को मात देने के लिए जी-जान से जुटे हुए है। दरअसल लडभड़ोल क्षेत्र के कई युवकों ने मुश्किल समय में हौंसला न हारते हुए अपने-अपने गांव तथा लडभड़ोल बाजार में फ़ास्ट फ़ूड रेस्टोरेंट खोले है।

फ़िलहाल बंद है होटल इंडस्ट्री
इसमें अधिकतर युवा नई सोच और जोश के साथ सस्ती दरों पर गांव में स्थानीय लोगों को फ़ास्ट फ़ूड उपलब्ध कर रहे है। बता दें करोना महामारी के चलते पूरी दुनिया में होटल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है जिसके कारण होटल इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग बेरोजगार हो कर घर वापिस आ गए हैं। लडभड़ोल तहसील क्षेत्र के सेंकडो युवा भी इस इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं । इनमें कई लोग समान्य होटल से लेकर पांच सितारा होटल में काम करते थे लेकिन करोना के कारण होटल इंडस्ट्री अभी फिलहाल बंद है या यूँ कहे की मंदी में है। इसके अभी लम्बे समय तक खुलने की उम्मीद कम ही है।

गांव में खोले रेस्तरां
ऐसे में इन बेरोजगार युवाओं के पास रोजगार का कोई साधन नहीं था जिसके चलते इन युवाओं ने अपने अपने गाँव में ही छोटे छोटे रेस्तरां खोल लिए हैं। ये युवा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को ध्यान में रख कर डाईन इन व पेकिंग की सुविधा भी दे रहे हैं। ये युवा कई तरह के पिज़्ज़ा, स्प्रिंग रोल, चोमिन, मोमो, बर्गर, चिल्ली चीज, चिल्ली चिकन, तंदूरी चिकेन, मसाला चिकन, आदि सस्ते दामों पर लोगों को उपलब्ध करवा रहे हैं।

बच्चे भी खुश
स्कूलों के बंद होने के कारण बच्चे घर पर हैं ऐसे में गाँव में ही रेस्तरां खुल जाने से उनकी ख्वाहिशें भी पूरी हो गई है। बच्चों का कहना है की पहले ये सब चीजों के लिए बाहर जाना पड़ता था लेकिन अब ये सब घर के पास ही उपलब्ध हो रहा है। कोरोना के कारण शहरों से गाँव आये लोग भी इस सुविधा से खुश हैं। उनका कहना है की ये लोग पहले बड़े बड़े होटलों में काम करते थे और फ़ूड एक्सपर्ट थे। उनके द्वारा बनाये गए विभिन्न प्रकार के फ़ास्ट फ़ूड लाजवाब हैं और सबसे बड़ी बात यह है की ये साधारण दामों पर इन्हें लोगों को दे रहे हैं।

गांव को भी बना रहे खुशहाल
इन होटल इंडस्ट्री से जुड़े युवाओं का कहना है की जब तक वे अपने होटलों में वापिस नहीं जाते है तब तक उन्हें शायद ऐसे ही काम करना पड़ेगा। अगर लोग इनके इस प्रयोग को पसंद करते हैं तो शायद ही वे अब कभी शहर वापिस जाएँ । लेकिन परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों इन युवाओं के इस प्रयास से जहाँ गावों के लोग भी फ़ास्ट फ़ूड का आनंद ले रहे हैं वहीं ये लोग गावं की आर्थिकी को भी सुदढ़ बना रहे हैं।





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