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  • लडभड़ोल : पिछले सप्ताह आपने लडभड़ोल क्षेत्र की सोशल मीडिया में एक खबर पढ़ी होगी जिसमे लडभड़ोल तहसील क्षेत्र के भरड़ोन गांव में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने एक अवैध चादरपोश खोके को गिरा दिया। खास बात यह रही की उस खोखे के मालिक ने खुद उस खोके को तोड़ने में प्रशासन की मदद की।

    इसमें खबर क्या है..?
    आपको लग रहा होगा की इसमें खबर क्या है.? प्रशासन ने जो किया सही किया..? बिलकुल, इसमें संदेह की कोई बात नहीं है। प्रशासन ने अपना काम किया। जो अवैध था उसे गिरा दिया मगर यह कहानी यहां खत्म नहीं होती।

    लडभड़ोल क्षेत्र में खुली थी कई दुकानें
    अगर आप लडभड़ोल तहसील के निवासी है तो आपने पुरे क्षेत्र में सड़क के किनारे ऐसे कई खोखे या ढाबे देखें होंगे जो सिर्फ कोरोना काल में खुले है। लडभड़ोल क्षेत्र के एक नहीं कई ऐसे लोगों ने कोरोना काल की आपदा में अवसर ढूंढा। ऐसी ही कहानी है 39 वर्षीय रविंदर कुमार की जिन्होंने कोरोना काल में भरडोन गांव के नजदीक यह दुकान खोली थी।

    चली गयी थी नौकरी
    भरडोन गांव निवासी रविंदर कुमार पेशे से ट्रक चालक है। कोरोना काल से पहले वह गुजरात में ट्रक चलाते थे। अच्छी आमदनी थी इसलिए आसानी से परिवार को भरण पोषण कर रहे थे। अचानक से हुए लॉक डाउन से उनकी नौकरी चली गयी और वह घर आकर बेरोजगार हो गए। अचानक से आमदनी बंद होने से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

    आपदा में खोजा अवसर
    कोरोना महामारी ने रविंदर की कमर ज़रूर तोड़ी, उनकी नौकरी पर गाज़ जरूर गिराई। मगर उन्होंने बजाय अपनी किस्मत को कोसने के इस आपदा में अवसर को खोज निकाला। उन्होंने घर के पास ही स्थित इस जगह पर अस्थाई तौर पर यह दुकान खोली थी जिसमे वह टॉफी, नमकीन, चाय आदि बेचकर अपने परिवार का भरणपोषण कर रहे थे।

    लोग नहीं समझते दर्द
    लडभड़ोल.कॉम से बात करते हुए रविंदर ने बताया की वह सिर्फ अस्थाई तौर पर यह दुकान चला रहे थे। जब भी उन्हें कम्पनी की तरफ से कॉल आएगा तब वह वापिस गुजरात चले जायेंगे। कोरोना काल वह आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थे लेकिन इस दुकान की वजह से उन्होंने मुश्किल समय में अपने परिवार का भरणपोषण किया है। उनका कहना है की लॉक डाउन के दौरान आमदनी शून्य हो जाने का दर्द वो लोग कभी नहीं समझ सकते जिनके खाते में हर महीने तनख्वाह आती हो।

    कोरोना काल में मिले कई सबक
    उन्होंने कहा की उन्हें प्रशासन से कोई गिला शिकवा नहीं है। प्रशासन ने अपनी ड्यूटी निभाई है और मैंने उनकी सहायता की। उनका कहना है की लडभड़ोल क्षेत्र भाईचारे की कमी से जूझ रहा है। लोग एक दूसरे की टांग खींचने में लगे है। टांग खींचने को बड्डपन समझने लगे है। कोरोना काल ने उन्हें कई सबक सिखाएं है जिन्हे वह आगे जिंदगी में प्रयोग करते रहेंगे।

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